Thursday, July 1, 2010

काबुलीवाला


जेब में जादू का दीया और बाती
मिन्नी की मटकती आँखें
और काबुलीवाले का जादू...

गलती से बड़ी हुई मिन्नी
काबुलीवाले ने घुमाई छडी
छोटी बन गई मिन्नी

चंदामामा, बूढ़ी नानी
साथ में लेकर आए कहानी
सपनों की धरती
सपनों से ख्वाब
सपनों की दुनिया फिर से बनी है

तुम खेलोगे?
देखोगे जादू ?
तो मिन्नी के संग दो आवाज़
काबुलीवाले , काबुलीवाले
तेरी झोली में क्या है....

'एक झोली और ख्वाब अनेक'
होंगे तेरी मुठ्ठी में
आया देखो काबुलीवाला
सरहद के पार से .......

35 comments:

  1. chhoti minni hi pyari hai, duniya ki pareshaniyon se dur aur khush......:)

    hai na di!!
    waise aapka ye blog kab ban gaya, kabhi dikha nahi......

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  2. वाह .. बहुत बढिया !!

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  3. वाह...काबुली वाले की झोली में बादाम और चिलगोज़े की जगह ख्वाब....बहुत सुन्दर..

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  4. ए़क बार फिर मिन्नी को फिर से काबुलीवाले के बहाने जीवन दिया ! सुंदर कविता

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  5. shukriya kahun? kabuliwale se fir milane ka?

    nahi jaane dijiye...ye hi to apka kaam hai :) :)

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  6. rashmi ji,
    bahut sundar rachna, badhai sweekaren.

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  7. काश अपना भी होता इतना सुन्दर बचपन .. जिसमे ऐसे सुन्दर गीत होते.. :)

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  8. वाह्……………।बहुत ही सुन्दर रचना।

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  9. bahut sundar!...

    bachapan kee yaaden fir se bachchha banaa deti hain .

    shubhkamanaayen........

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  10. काबुलीवाले - ओ - काबुलीवाले
    तेरी झोली में क्या ?
    मैं खेलूंगी , देखूंगी जादू,
    मिन्नी संग मैं भी घुमुंगी...
    दिखाओंगे न् मुझे भी ?
    ले जाओंगे न् -
    सपनो की धरती पर,
    सपनो से ख्वाब मैं ... ILu...!

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  11. बहुत सुन्दर पोस्ट!
    --
    आपकी चर्चा तो यहाँ भी है!
    http://charchamanch.blogspot.com/2010/07/203.html

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  12. बहुत ही सुन्दर और बढिया

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  13. Rashmiji,
    Kavivar Ravindr Nath Tagor ki kahani ka KAVY ROOPANTRAN bahut marmsparshi bana hai. Sunder bhavaabhivyakti ki hai aapne.

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  14. हर बार की तरह इस बार भी बड़ी ही सुन्दर रचना है| क्योंकि समय नहीं रहता इस वजह से आप का ब्लॉग नियमित रूप से पढ़ नहीं पाता|
    "एक झोली और ख्वाब अनेक"..
    बहुत ही अच्छी पंक्तियाँ हैं|

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  15. बचपन में कुछ किरदार हमारे मानस पटल पर हमेशा के लिए कुछ अमिट छाप छोड़ जाते हैं.. जीवन में किसी ना किसी मोड़ पे उनकी बताई बातें याद भी आती हैं और काम भी.. आपकी इस रचना ने कुछ ऐसे किरदारों का आज स्मरण करा दिया.. धन्यवाद

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  16. सुन्दर प्रस्तुति .

    कल था सृजन का जन्म दिन .

    बाल मंदिर में पढ़िए जन्म दिन आपको मुबारक हो

    http://baal-mandir.blogspot.com/

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  17. दूरदेश से आये काबुली वाले की झोली से बचपन की कोमलता ओर मासूमियत के ख्वाब जीवंत कर दिए आपकी इस बहुत सुन्दर कविता ने......शुभकामनाएं...!!!

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  18. रश्मि जी सुन्दर सन्देश युक्त प्यारी रचना ...एक झोली और ख्वाब अनेक ..यही तो दशा है हर जगह ........
    स्वतंत्रता दिवस और राखी की हार्दिक शुभ कामनाएं

    भ्रमर ५

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  19. क्या बात है,
    बहुत सुंदर रचना

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  20. प्रिय रश्मि जी अभिवादन ...बहुत सुन्दर रचना ..मन को छू गयी
    भ्रमर ५
    बाल झरोखा सत्यम की दुनिया

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  22. kabulivala ki mini ko jeevany kiya aapne

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  23. bahut sundar kavita likhi hai.....!

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  24. मैं अब तक कहाँ थी कि इस ब्लॉग को मिस किया ..अब तक

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  25. bachpan ki yaad dila di rashmi ji aapne ! sundar prastuti !

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  26. बचपन में वापस लौटने को कर रहा है मन ....
    बहुत सुंदर ..
    साभार !!

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