Monday, December 22, 2008

लहरें साथ देंगी.....

तुम्हारे पास लकड़ी की नाव नहीं ,
निराशा कैसी?
कागज़ के पन्ने तो हैं !
नाव बनाओ और पूरी दुनिया की सैर करो..........
हर खोज,हर आविष्कार तुम्हारे भीतर है ,
अन्धकार को दूर करने का चिराग भी तुम्हारे भीतर है
तुम डरते हो कागज़ की नाव डूब जायेगी , पर
अपने आत्मविश्वास की पतवार से उसे चलाओ तो
हर लहरें तुम्हारा साथ देंगी.........

37 comments:

  1. हाँ दी....
    सही कहा आपने...नाव कैसी भी हो...पतवार मजबूत होनी चाहिए...
    पतवार मजबूत हो तो नाव को हर स्थिति में संभल लेती है...
    बस पतवार को डगमगाने नहीं देना चाहिए...

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  2. bahut achchi seekh atmvishwaas banaye rakhane ki. bahut umda.

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  3. wah kya baat kahi hai di!sachmuch aatmvishvaas ki patwar se har tarah ki naav chalai ja sakti hai...ati sunder

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  4. aatmvishwas hi to hum sabhi ki punji hai jiske sahare hum bade se bade kamon main saphalta hasil kar lete hai.
    mujhe aapki yah kavita bahut hi achhi lagi.Apka blog achha hai.aapne mere blog ke liye jo sujhav diye uspar main amal karoonga.
    Dhanyawad

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  5. Sakaratmak sooch ki bhawna ko majbooti pradan karti ek achchi rachna.

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  6. BILKUL SAHI KAHA HAI AAPNE DI, BINA VISWAS KE HUM KUCHH NAHI KAR SAKTE.. KAAM KARNE SE PAHLE HI AGAR DIL ME YE KHAYAAL LE AATE HAIN KI YE PURA HOGA YA NAHI TO USE PURE MANN SE KAR BHI NAHI PATE.. AGAR PURE AATMVISHWAS SE KOI BHI KAAM KIYA JAYE TO SAFALTA KI UMMID JYADA HOTI HAI.. SAFAL HONA NA HONA BAAD KI BAAT HAI PAHLE HUME KOSHISH TO KARNI CHAHIYE.. WAHI WALI BAAT AA JATI HAI NA JO KRISHNA JI NE GEETA ME KAHA HAI KI TUM KARAM KARO FAL KI UMMID NA KARO.. HUM SAB PAHLE SE HI RESULT KI SOCH KAR APNA KAAM YA TO KARNA HI NAHI CHAHTE IS DARR SE KI NAHI HOGA, YA OVER CONFIDENT HOKAR AASAB SA KAAM BIGAAD LETE HAIN.. WAHI WALA SONG FIR YAAD AA GAYA..
    LAHRO SE DARKAR NAUKA KABHI PAAR NAHI HOTI,
    KOSHISH KARNE WALE KI KABHI HAAR NAHI HOTI..

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  7. sahi akha atam vishwas ki patwaar hame har sthiti se nikal lati hai

    bhaut acha laga khyaal

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  8. bahut he accha likha hai aapne...isi tarah likhte rahe...

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  9. अपने आत्म्विश्रास की पतवार से......
    हर लहरे तुम्हारा साथ देंगी.....
    बहुत सुंदर , आत्म समान से भरपुर,एक हिम्मत देती कविता.
    धन्यवाद

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  10. तो हर लहरें तुम्हारा साथ देंगी
    बढाओगे गर हाथ तो अपना हाथ देंगी

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  11. didi pranaam !

    kavita apna samaapan ek asha ke sath karti ,jisaki main kayal hoon .
    aatmbal ka samarthan karti ek bahut achchhi rachana ..........

    aabhar

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  12. बहुत ही सुन्दर रचना

    ---मेरा पृष्ठ
    चाँद, बादल और शाम

    ---मेरा पृष्ठ
    तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

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  13. akhir kagaj bhi to lakdi se bana hai naav to kagaj ki kaho ya lakdi ki ek hi to baat hai

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  14. ऐसी आशावादी रचनाओं से आत्मबल मिलता है.

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  15. बहुत ही उम्दा रचना है।बहुत सुन्दर लिखी है।

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  16. आत्मविश्वाश एक चमत्कार का नाम है | जब विश्वाश अपनी घहराई के साथ मन में बैठ जाता है वह अवश्य फलदाई होता है | जब तक आप विश्वाश न करेंगे | आप कुछ ना पा सकेंगे |

    शहद की मक्खी से आप परिचित हैं | आप जानते भी हैं कि वह तिल तिल कर शहद जुटाती है | उसे कहीं से शहद का खज़ाना नहीं मिला हुआ है | उसके छत्ते में भरा शहद उसकी अपनी अनवरत म्हणत का नतीजा है |

    क्या ठीक उसी प्रकार तिल तिल करके आपको भी सफलता का मधु नहीं जुटाना होगा?

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  17. जब आत्मविश्वास हो तो फिर कैसे भी हो नाव पार तो हो ही जायेगी..

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  18. सुन्दर अभिव्यक्ति

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  19. आपने एकदम सही बात कही है क्योकि....... किस्मत भी हमेशा बहादुरों का ही साथ देती है......

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  20. Bilku sahi kaha aapne aatmvishwas se har mushkil ka samana kiya ja sakta hai. Bahut sundar rachna ke liye badhai.

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  21. बहुत खूब पर ये कविता जिन्दा कौमों के लिए है...........

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  22. हर लहरे तुम्हारा साथ देंगी. बस आत्मविश्वास होना चाहिए.बहुत प्रेरक रचना है.

    अब से आपका भी आशीर्वाद चाहूँगा.
    - सुलभ
    (पटना दौरे पर शायद आपसे संपर्क हो जाये..)

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  23. मां आज पहली बार आपके इस सुनहरे ब्लाग पर आना हुआ, पर मां! दिल से कहता हू अच्छा लगा

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  24. बच्चे निसंदेह फ़रिश्ता होते हैं.आपने बहुत अच्छा संसार रचा है.हमने भी अपने बच्चों के बहाने इन मासूमों के लिए एक दुनिया बनाने की कोशिश की है.आपका स्वागत है!

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  25. RASHMI PRABHAJI,
    Shekhar Suman ke blog per aap ki do kavitayen dekh kar yahan pahunche hain.Prastut kavita sahi sandesh de rahi hai.

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  26. होसला देने वाली रचना ..बहत अच्छा

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  27. sach kaha hai aapne..pankhon se nahi hauslon se udan hoti hai...behtarin sadar badhayee ke sath

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  28. कागज़ की नाव बनाओ
    और दुनिया की सैर करो...

    प्रेरक रचना दी...
    सादर.

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  29. हर लहरें तुम्हारा साथ देंगी --|सच ----|तब तो मंजिल दूर नहीं !

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